How to Track Portfolio Performance Curve in Zerodha | ज़ेरोधा का कंसोल पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस कर्व क्या है?

शेयर बाजार में निवेश करने वाले हर निवेशक के मन में यह सवाल जरूर आता है कि ‘वास्तव में मेरा पोर्टफोलियो कैसा प्रदर्शन कर रहा है?’ आमतौर पर लोग अपने पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू (Total Account Value) देखकर ही अपनी ग्रोथ का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन यदि आप अपने डीमैट अकाउंट में समय-समय पर नए पैसे जमा (Deposit) करते हैं या जरूरत पड़ने पर पैसे निकालते (Withdraw) हैं, तो केवल कुल वैल्यू को देखकर अपने वास्तविक रिटर्न (Actual Return) की गणना करना बहुत मुश्किल हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका पोर्टफोलियो ₹1 लाख का था और आपने उसमें ₹50,000 और जमा कर दिए, तो अकाउंट वैल्यू ₹1.5 लाख दिखेगी, लेकिन यह ₹50,000 आपकी निवेश की कमाई नहीं है, बल्कि आपका नया डिपॉजिट है। इसी समस्या का हल निकालने के लिए ज़ेरोधा (Zerodha) ने अपने बैक-ऑफिस प्लेटफॉर्म Console पर एक बेहतरीन फीचर दिया है, जिसे Portfolio Performance Curve (पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस कर्व) कहा जाता है। इस विस्तृत गाइड में हम आपको आसान हिंदी में समझाएंगे कि ‘ज़ेरोधा परफॉर्मेंस कर्व क्या है, यह कैसे काम करता है, इसे देखने का तरीका क्या है और यह अकाउंट वैल्यू कर्व से कैसे अलग है?’

त्वरित सारांश: ज़ेरोधा का पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस कर्व (Performance Curve) एक ग्राफिकल टूल है जो म्यूचुअल फंड के NAV (Net Asset Value) की तरह काम करता है। यह टूल आपके अकाउंट में जमा किए गए या निकाले गए पैसों के प्रभाव (Deposits and Withdrawals) को हटाकर आपके निवेश पर मिलने वाले शुद्ध और वास्तविक रिटर्न को दिखाता है। इसे आप ज़ेरोधा कंसोल पर बिल्कुल फ्री में देख सकते हैं और इसकी तुलना Nifty 50 जैसे इंडेक्स से भी कर सकते हैं।


1. पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस कर्व क्या है और यह काम कैसे करता है?

जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो आपको यूनिट्स अलॉट की जाती हैं और फंड का प्रदर्शन NAV (Net Asset Value) के जरिए ट्रैक किया जाता है। ठीक इसी प्रकार, ज़ेरोधा का परफॉर्मेंस कर्व भी आपके स्टॉक और म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के लिए एक कस्टमाइज्ड NAV कर्व तैयार करता है:

  • NAV बेसलाइन (Base NAV): जब आप पहली बार अपना पोर्टफोलियो ट्रैक करना शुरू करते हैं या किसी चुनी हुई तारीख से ग्राफ देखते हैं, तो ज़ेरोधा आपके पोर्टफोलियो की बेस वैल्यू को 1,000 NAV मान लेता है।
  • डिपॉजिट का एडजस्टमेंट: जब आप अपने ट्रेडिंग अकाउंट में अतिरिक्त फंड जमा करते हैं, तो स्क्रीन पर आपके पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू तो बढ़ जाती है, लेकिन आपका NAV कर्व स्थिर रहता है। सिस्टम नए पैसे के लिए नई यूनिट्स क्रिएट कर देता है, जिससे आपका वास्तविक परफॉर्मेंस ग्राफ प्रभावित नहीं होता।
  • विड्रॉल का एडजस्टमेंट: इसी तरह, जब आप अपने अकाउंट से पैसे निकालते हैं, तो कुल अकाउंट वैल्यू कम हो जाती है, लेकिन यूनिट्स कम होने के कारण NAV (परफॉर्मेंस कर्व) पर कोई गिरावट नहीं दिखती।
  • शुद्ध रिटर्न ट्रैकिंग: यह कर्व केवल आपके शेयर्स और म्यूचुअल फंड्स की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव (Capital Appreciation/Depreciation) के आधार पर ऊपर या नीचे जाता है।

इसके उपयोग से आप जान सकते हैं कि आपकी चुनी हुई स्टॉक पिकिंग स्ट्रेटेजी वास्तव में मुनाफा कमा रही है या केवल नए पैसे जमा करने के कारण आपका पोर्टफोलियो बड़ा दिख रहा है।


2. अंतर: अकाउंट वैल्यू कर्व बनाम पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस कर्व

ज़ेरोधा कंसोल पर निवेशकों को दो अलग-अलग ग्राफ दिखाई देते हैं। इन दोनों के मुख्य अंतर को नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:

विशेषता (Parameters) अकाउंट वैल्यू कर्व (Account Value Curve) पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस कर्व (Performance Curve)
मुख्य फोकस यह दिखाता है कि किसी विशिष्ट तारीख को आपके अकाउंट का कुल मूल्य (Equity + Mutual Funds + Cash) कितना था। यह दिखाता है कि समय के साथ आपके द्वारा चुने गए स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड्स ने कितना प्रतिशत रिटर्न दिया है।
फंड डिपॉजिट का असर जब आप नया फंड ऐड करेंगे, तो यह ग्राफ अचानक ऊपर की तरफ एक वर्टिकल स्पाइक (Spike) दिखाएगा। नया फंड ऐड करने पर इस ग्राफ में कोई स्पाइक नहीं आता। यह केवल आपके निवेश की असली ग्रोथ दर दिखाता है।
फंड विड्रॉल का असर अकाउंट से पैसे निकालने पर यह ग्राफ तुरंत नीचे गिर जाता है। पैसे निकालने पर इस ग्राफ में कोई गिरावट नहीं आती, क्योंकि यह आपके निवेश पर प्रतिशत लाभ को नहीं बदलता।
म्युचुअल फंड्स जैसा व्यू नहीं, यह केवल आपकी शुद्ध बैलेंस शीट की तरह काम करता है। हाँ, यह पूरी तरह से एक म्यूचुअल फंड के ऐतिहासिक NAV चार्ट की तरह व्यवहार करता है।
इंडेक्स बेंचमार्किंग इसकी तुलना किसी मार्केट इंडेक्स (जैसे Nifty 50) से नहीं की जा सकती। इसकी तुलना Nifty 50 या Nifty 500 से करके जान सकते हैं कि आपने इंडेक्स को बीट किया है या नहीं।

3. ज़ेरोधा कंसोल पर परफॉर्मेंस कर्व कैसे देखें? (Step-by-Step Guide)

कंसोल (Console) ज़ेरोधा का रिपोर्टिंग और पोर्टफोलियो ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म है। परफॉर्मेंस कर्व देखने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें:

परफॉर्मेंस कर्व देखने की प्रक्रिया:

  1. अपने वेब ब्राउज़र पर ज़ेरोधा का बैक-ऑफिस पोर्टल Zerodha Console (console.zerodha.com) खोलें और काइट पिन के जरिए लॉग इन करें।
  2. लॉग इन करते ही आप मुख्य Dashboard पेज पर पहुँच जाएंगे।
  3. डैशबोर्ड पर थोड़ा नीचे की तरफ स्क्रॉल करें। वहाँ आपको ‘Portfolio Performance’ या ‘Performance’ का एक ग्राफिकल सेक्शन दिखाई देगा।
  4. डिफ़ॉल्ट रूप से यह ग्राफ़ आपके पूरे पोर्टफोलियो (Equity + Mutual Funds) का संयुक्त प्रदर्शन दिखाता है। आप चाहें तो केवल ‘Equity’ या केवल ‘Mutual Funds’ का फ़िल्टर सिलेक्ट कर सकते हैं।
  5. ग्राफ के ऊपर दिए गए टाइम-फ़िल्टर्स (जैसे 3 Months, 6 Months, 1 Year, या Custom Date Range) का उपयोग करके अपनी पसंद की अवधि चुनें।
  6. चार्ट के ऊपर दिए गए ‘Compare with Index’ या ‘Benchmark’ विकल्प पर क्लिक करके आप NIFTY 50 को सिलेक्ट कर सकते हैं, जिससे स्क्रीन पर एक साथ दो लाइनें (एक आपके पोर्टफोलियो की और दूसरी निफ्टी 50 की) दिखाई देने लगेंगी।

4. इंडेक्स बेंचमार्किंग (Index Benchmarking) क्यों जरूरी है?

एक निवेशक के रूप में आपका मुख्य लक्ष्य होना चाहिए बाजार के औसत रिटर्न से अधिक कमाना (Outperforming the Market)। यदि निफ्टी 50 इंडेक्स 15% का रिटर्न दे रहा है और आपका पोर्टफोलियो केवल 12% का रिटर्न दे रहा है, तो इसका मतलब है कि सीधे इंडेक्स फंड या ईटीएफ (ETF) में निवेश करना आपके लिए अधिक फायदेमंद होता।

ज़ेरोधा परफॉर्मेंस कर्व आपको यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि आपका पोर्टफोलियो (पर्पल या ब्लू लाइन) निफ्टी 50 (ग्रे लाइन) से ऊपर चल रहा है या नीचे। यदि आपका कर्व लगातार निफ्टी से नीचे रहता है, तो आपको अपने स्टॉक चयन में बदलाव करने या म्यूचुअल फंड्स में स्विच करने की सलाह दी जाती है। आप इसे आसानी से Kite Screener की मदद से अच्छे स्टॉक्स को दोबारा चुनकर सुधार सकते हैं।


5. ज़ेरोधा के साथ स्मार्ट निवेश और सटीक रिपोर्टिंग का लाभ उठाएं!

ज़ेरोधा न केवल आपको स्टॉक संकेतकों और कम ब्रोकरेज की सुविधा देता है, बल्कि इन-बिल्ट स्क्रीनर, रीयल-टाइम ट्रेडिंगव्यू चार्ट्स और डायरेक्ट ऑर्डर प्लेसमेंट जैसे अत्याधुनिक टूल्स भी प्रदान करता है। यदि आप भी भारत के सबसे सुरक्षित और तकनीकी रूप से एडवांस ब्रोकर के साथ जुड़ना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आधिकारिक रेफरल लिंक का उपयोग करके आज ही अपना खाता खोलें:

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निष्कर्ष (Conclusion)

संक्षेप में, Zerodha Portfolio Performance Curve केवल एक ग्राफ नहीं है, बल्कि आपके निवेश कौशल का असली आईना है। यह आपके पोर्टफोलियो में जमा या निकाले गए पैसों के शोर (Noise) को पूरी तरह से साफ कर देता है और आपको आपके निवेश पर वास्तविक सीएजीआर (CAGR) और रिटर्न दिखाता है। इस टूल की मदद से इंडेक्स के साथ तुलना करके आप अपने निवेश निर्णयों को अधिक बेहतर और प्रोफेशनल बना सकते हैं। यदि आप भी अपनी वेल्थ क्रिएशन को लेकर गंभीर हैं, तो आज ही ज़ेरोधा कंसोल पर लॉग इन करें और अपने पोर्टफोलियो के प्रदर्शन का सही तरीके से विश्लेषण करें!


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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

हाँ! परफॉर्मेंस कर्व पर दिखने वाला डेटा हर कारोबारी दिन (Trading Day) की समाप्ति के बाद रात को डेली प्रोसेस (Daily EOD Processing) के दौरान अपडेट होता है। दिन के दौरान लाइव मार्केट आवर्स में यह रीयल-टाइम अपडेट नहीं होता, क्योंकि क्लोजिंग प्राइस आने के बाद ही इसकी सटीक गणना की जाती है।

यह परफॉर्मेंस ट्रैकिंग का एक स्टैंडर्ड तरीका (Mutual Fund NAV standard) है। 1,000 को आधार मूल्य (Baseline) मान लेने से प्रतिशत में रिटर्न की गणना करना और उसकी तुलना Nifty 50 जैसे बाहरी बेंचमार्क इंडेक्स से करना बहुत आसान और सटीक हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका NAV 1,000 से बढ़कर 1,200 हो गया है, तो इसका मतलब है कि आपके निवेश पर 20% की शुद्ध वृद्धि हुई है।

हाँ! ज़ेरोधा कंसोल पर मिलने वाले परफॉर्मेंस कर्व में आपके इक्विटी डिलीवरी पोर्टफोलियो, म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स के साथ-साथ आपके डेरिवेटिव्स (F&O), इंट्राडे (MIS) और कमोडिटी ट्रेडिंग के रीयलाइज्ड प्रॉफिट और लॉस को भी शामिल किया जाता है। यह आपके पूरे ट्रेडिंग और निवेश करियर का एक संयुक्त और व्यापक रिपोर्ट कार्ड होता है।

नहीं! कंपनियों द्वारा मिलने वाला डिविडेंड सीधे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है, न कि आपके ज़ेरोधा ट्रेडिंग अकाउंट में। इसलिए, परफॉर्मेंस कर्व स्टॉक के डिविडेंड पेआउट्स को शामिल नहीं करता। यह केवल आपके स्टॉक की कीमतों में होने वाली वृद्धि (Capital Gain) और क्लोजिंग वैल्यू को ही दर्शाता है।

हाँ, आप निफ्टी 50 (Nifty 50) के अलावा अपनी पसंद के विभिन्न ब्रॉड मार्केट इंडेक्स जैसे Nifty 500, Nifty Midcap 100 या Nifty Smallcap 100 से भी तुलना कर सकते हैं। यह तुलना इस बात पर निर्भर करती है कि आपने किस प्रकार के स्टॉक्स में मुख्य रूप से निवेश किया हुआ है ताकि बेंचमार्किंग बिल्कुल सही हो।

यदि आपका पोर्टफोलियो लगातार बेंचमार्क से कम रिटर्न दे रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके चुने हुए स्टॉक्स का चयन बाजार के औसत प्रदर्शन से कमजोर है। ऐसे में आपको अपने पोर्टफोलियो का री-एनालिसिस करना चाहिए, कमजोर प्रदर्शन करने वाले स्टॉक्स से एग्जिट करना चाहिए, या फिर सीधे इंडेक्स म्यूचुअल फंड्स/ईटीएफ में अपना एलोकेशन बढ़ा देना चाहिए ताकि आपको बाजार के बराबर रिटर्न मिल सके।


डिस्क्लेमर (Disclaimer): शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।

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